
नई दिल्ली। बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में फैसला देने वाले जज को अब निजी सुरक्षा देने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने इंकार कर दिया है। पूर्व न्यायाधीश एस के यादव ने इस फैसले में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी एवं उमा भारती समेत सभी 32 आरोपियों को बरी कर दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने जज एसके यादव की सुरक्षा बढ़ाने से इंकार कर दिया है।
न्यायमूर्ति आर एफ नरीमन की अध्यक्षता वाली पीठ पूर्व न्यायाधीश के आवेदन पर विचार कर रही थी जिसमें उन्होंने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अपनी निजी सुरक्षा को जारी रखने का आग्रह किया था। इस पीठ में न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा और न्यायमूर्ति कृष्णा मुरारी भी शामिल हैं। पीठ ने कहा, पत्र देखने के बाद हम सुरक्षा प्रदान करना उचित नहीं समझते हैं।
तीस सितंबर को विशेष अदालत ने सभी आरोपियों को बरी करते हुए कहा था कि अयोध्या में विवादित ढांचे को गिराने के लिए इन लोगों के किसी भी साजिश का हिस्सा होने के कोई निर्णायक सबूत नहीं हैं।

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